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Thursday, January 5, 2017

राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था- Political & Administrative view in Rajasthan

अनुच्छेद 164 मंत्रियों के बारे में उपबंध है।

164(1) मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा तथा अन्य मंत्रियो की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल द्वारा की जायेगी। मंत्री , राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त अपने पर बने रहेगे।

164(2) मंत्रिपरिषद राज्य की विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उतरदायी है।

164(3) किसी मंत्री द्वारा अपना पद ग्रहण करने से पहले, उसे पद की और गोपनियता की शपथ दिलायेगा।

164(4) किसी मंत्री के लिए 6 माह में राज्य विधानमण्ड़ल का सदस्य होना अनिवार्य।

165(5) मंत्रियों के वेतन और भत्ते राज्य विधानमण्डल की विधि द्वारा अवधारित किये जाते है, जब तक ऐसा न हो तब तक ऐसे होगे जो दितीय अनुसूची में विनिर्दिष्ट है।

राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है जिसका कार्यकाल सामन्यतः 5 वर्षो का होता है।

संविधान में मुख्यमंत्री के कर्तव्य अनुच्छेद 167 में निर्धारित है।

भारतीय संविधान के अधिनियम 323 के अर्न्तगत राज्य लोक सेवा आयोग अपना प्रतिवेदन राज्य के राज्यपाल को सौपते है जैसे, भर्ती, पदोनिति, वरिष्ठता निर्धारण, अनुशात्मक कार्यवाही, अस्थायी सेवाओं की स्वीकृति तथा अन्य परामर्श संबंधी सभी कार्यो का सम्पूर्ण विवरण ।

राजस्थान की प्रथम विधानसभा के अध्यक्ष नरोतमलाल जोशी थे।

राज्य की कार्यपालिका की शक्ति सीमा में किसी सिद्वीदोष व्यक्ति के दण्ड़ को क्षमा करना राज्यपाल की कार्यशक्ति में नही आता है।

कोई व्यक्ति मंत्री पद पर नियुक्ति के समय विधानमण्डल का सदस्य नहीं है तो उसके लिए 6 माह के भीतर विधानमण्डल की सदस्यता प्राप्त करना आवश्यक होता है।

महिलआें को पंचायत में आरक्षण संबधी अधिकार 1992 का 73 वां संशोधन में दिया गया व सभी वर्गो में 1/3 स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए है।

राजस्थान की प्रथम महिला विधायक यशोदा देवी थी जो 1953 में बॉसवाड़ा से उपचुनाव में विधायक चुनी गई।

हरिदेव जोशी राज्य में एक मात्र ऐसे विधायक रहे, जो प्रथम चुनाव से लेकर दसवी विधानसभा कतक निरन्तर विजयी रहे तथा मृत्युपर्यन्त विधानसभा सदस्य रहे।

राजस्थान की प्रथम निर्वाचित लोकतान्त्रिक सरकार ( 3 मार्च 1952 से 31 अक्टुम्बर 1952)।

प्रथम विधानसभा चुनावो में तत्कालिन मुख्यमंत्री जयनराययण व्यास के चुनाव हार जाने के कारण श्री पालीवाल के नेतृत्व सरकार बनी। पालीवाल मंत्रिमण्डल ने 31 अकटुम्बर 1952 को त्यागपत्र दे दिया।

राजस्थान के राज्यपाल दरबार सिहं पहले 23 मई 1998, निर्मलचंद जैन दूसरे 21 सितम्बर 2003, एस. के. सिहं तीसरे 1 दिसम्बर 2009 और प्रभा सिहं चौथी 26 अ्रपैल 2010 का निधन हुआ।


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Wednesday, January 4, 2017

राजस्थान के प्रमुख विभागो की शुरूआत व नियुतियां-

राजस्थान उच्च न्यायालाय के सेवा निवृत न्यायाधीश श्री सज्जन सिहं कोठारी को राज्य का नया लोकायुक्त नियुक्त किया है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग का गठन 20 अगस्त 1949 को हुआ संविधान के अनुच्छेद 315 के अर्न्तगत तथा प्रथम अध्यक्ष सर. एस. के. घोष को बनाय गया।

राजस्थान राज्य मानवधीकर आयोग का गठन 2000 में किया गया।

राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यो का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु में जो भी पहले हो।

राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यो की संख्या एक अध्यक्ष सहित एवं सात सदस्य होते है अर्थात कुल आठ होते है।

राजस्थान राज्य अभिलेखाकार बीकानेर में स्थित है तथा इसकी स्थापना 1955 में की गयी है।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की स्थापना अजमेर में 1957 को की गयी।

सामाजिक शोध केन्द्र तिलोनिया(अजमेर) में स्थित है जो कपडो पर पेचवर्क के लिए प्रसिद्व है।

राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण जयपुर में स्थित है व 1 जुलाई 1976 को गठन किया था जिसकी एक पीठ जोधुपर में 30 अक्टुम्बर 1996 में को गठन की गयी है।

राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉदर्न अमेरिका राना है।

राजस्व बोर्ड का मुख्यालय अजमेर में है प्रथम अध्यक्ष ब्रजच्रन्द्र शर्मा थ

Tuesday, January 3, 2017

राजस्थान में प्रजामण्ड़लो की स्थापना - Prajamandal establishment in Rajasthan

राजस्थान में प्रजामण्ड़लो की स्थापना :-Main Topic which cover in Every Rajasthan Government Exam RPSC ,RMSSB, RAS,PATWAR,GRAM SEVAK, LDC.

1.डूगरपूर प्रजामण्डल की स्थापना 1944 में भोगीलाल पाडया व शिवलाल कोटिल्या द्वारा की गई थी।

2.सिरोही प्रजामण्ड़ल की स्थापना 23 जनवरी 1939 गोकुल भाई भट्ट द्वारा की गई।

3.राजस्थान का प्रथम प्रजामण्डल जयपुर प्रजामण्डल था।

4. जयपुर प्रजामण्डल की कुछ खास बाते- कपूरचंद पाटनी की अध्यक्षता में सर्वप्रथम 1931 में गठित,

5.चिरजीलाल मिश्रा की अध्यक्षता में पुनजीवित (1936-37), 1938 में जमनालाल बजाज अध्यक्ष बने, 1942 में    भारत छोडो आदोलन में सक्रिय भाग नही लेने वाला प्रजामण्डल(अलवर भी था)

6.जेन्टिलमेनटस एग्रीमेन्ट-सितम्बर 1942 में जयपुर के प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माइल व श्री हीरालाल शास्त्री के मध्य हुआ समझौता।

7.आजाद मोर्चा- भारत छोडो आदोलन में जयपुर प्रजामण्डल की निष्क्रीयता से असतुष्ट होकर श्री बाबा हरिशचन्द्र, रामकरण जोशी, दौलत भण्डारी, श्री हंस दी राय, द्वारा गठित संगठन जिसका विलय प्रजामण्डल में 1945 में हुआ।

8. उदयपुर प्रजामण्डल आदोलन से संम्बधित महिला नारायणी देवी थी जो कि माणिकय लाल वर्मा की पत्नी थी सन् 1942 में इन्होने भारत छोडो आदांलन मे भाग लिया।

9. करौली प्रजामण्डल की स्थापना 1938 मुंशी त्रिलोकचंद माथुर ने की।

10. मंशी त्रिलोकचंद माथुर ने 1938 में प्रातिंय कांग्रेस कमेटी, अजमेर की शाखा करौली में स्थापित की।

11. बीकानेर प्रजामण्डल की स्थापना कलकता में सन् 1936 में मेघाराम वैध द्वारा की गयी।

12. जैसलमैर प्रजामण्डल - मीठालाल व्यास , झालावाड राज्य प्रजामण्डल - कन्हैयालाल मितल।

13. मेवाड़ प्रजामण्डल 1938 में प्रथम अध्यक्ष बलवत सिहं मेहता व उपाध्यक्ष भूरेलाल बया को बनाय गया ,          महामंत्री माणियलाल वर्मा को बनाया गया।

14. मेवाड प्रजामण्डल की स्थापना 24 अप्रेल 1938 को माणिक्यलाल वर्मा के प्रयासो से हुई।
     नबम्बर, 1941 को प्रथम अधिवेशन माणिक्य लाल वर्मा की अध्यक्षता में उदयपुर में हुआ जिसमे आचार्य          जे.बी. कृपलानी व श्रीमती विजयलक्षमी पण्डित ने भाग लिया।11 अक्टुम्बर 1938 को जब मेवाड                      प्रजामण्डल को गैर-कानूनी घोषित किया और सब को नजरबंद किया तब नाथद्वारा से सविनय अवज्ञा            आन्दोलन प्रारम्भ किया जो महात्मा गांधी के परामर्श पर 3 मार्च 1939 को स्थगित किया।
     माणिक्यलाल वर्मा ने अजमेर से ‘मेवाड़ का वर्तमान शासन‘ नामक पुस्तिका प्रकाशित कर मेवाड़ में                कुशासन  की पोल खोल दी।

15. 1938 मे विभिन्न प्रजामण्डलो की स्थापना हुई व 1938 में कांग्रेस ने राज्यों मे चल रहे स्वतंत्रा आन्दोलनो         के प्रति सहानभूति प्रकट की।

16. भरतपुर प्रजामंण्डल 1938 में किशनलाल जोशी व मास्टर आदित्ययेन्द्र द्वारा स्थापित।

17.शाहपुरा प्रजामंण्डल 18 अप्रेल 1938 में लादूराम व्यास , रमेश चन्द्र ओझा ने की।

18.1938 में कांग्रेस ने हरिपुरा अधिवेशन में सर्वप्रथम देशी रियासतो को भारत का अभिन्न अंग मानते हुए,             उनमे उतरदायी सरकारो की स्थापना का प्रस्ताव दिया।

19. हाडौती सेवा संघ(1934) का सस्थापंक नयूनराम शर्मा था।

20.कोटा प्रजामण्डल (1939) को नयूनराम शर्मा व पं. अभिन्न हरि के साथ मिलकर कर स्थापना की।
     कोटा प्रजामण्डल का प्रथम अधिवेशन पं. नयूनराम की अध्यक्षता में मांगरोल में हुआ।

21. 31 दिसम्बर, 1945 से 1 जनवरी 1946 तक उदयपुर में ऑल इण्डिया स्टेट्स पीपल्स कान्फेस की अध्यक्षता पं. जवाहर लाल नेहरू ने की।

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